बरकत उन हाथों की












वो जा रहीं थीं

उखड़ती साँसों को संभालने

अक्सर वो बैठ कर ही सोती थीं

शांत मुद्रा और संतोष की झलक

उनकी तकलीफ को छुपा देती थी

पास बैठ मैंने अपने हाथों में उनके हाथ ले लिए

वो हाथ जिन्होंने मुझे चलना सिखाया

वो हाथ जो गिरने पर मुझे उठाते थे

तरह तरह के व्यंजन बना खिलाते थे

वो हाथ जिन्होंने मुझे टैटिंग करना

अचार डालना और न जाने क्या क्या सिखाया

वो हाथ जिन्होंने सहला सहला कर ही अक्सर मेरा बुखार उतार दिया

अपने उन हाथों से कस के मेरा हाथ पकड़

अपनी उस असहनीय तकलीफ में भी एक मुस्कान फेंक

वो बोलीं जाओ सो जाओ बेटा

मैं ठीक हूँ

आशीर्वाद देने वाले हाथ शायद

हाथ छूटने का एहसास कर

ढेरों आशीष देना चाहते थे


डॉ अर्चना टंडन

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