प्यार- एक अबूझ पहेली
प्यार
एक बयार
भिगोती हुई फुहार
सुनाई देती एक धुन
मिलन की तड़प
लुटने का एहसास
समाहित होने का ख्याल
तो क्यूँ न इस
बयार में भटक जाऊं
फुहार में भीग जाऊं
धुन में बहक जाऊं
तड़प में मिट जाऊं
मिट कर तुझमें समा जाऊं
समाहित हो तुझे पा जाऊं
अर्चना टंडन
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