Posts

A Mission Was Accomplished

Image
A Mission Was Accomplished A task to be done Laziness abandoned  It was at no-one's behest  But to fulfill our President's request  During the satisfying travel  Never did I once feel the uneven gravel  Fully supported by my team  I rode to fulfill a dream We planned and executed in unison  Slowly we moved in the forward direction  Experts in the academic field we pursued  Our determination never getting subdued  We honed up our caliber  As the luminaries queued up to deliver They briefed us with the best in the subject Well understanding our primary object Our parent body was benefited  As the plan got executed  Finally the day of Fan and Fare dawned It took off fairly well as planned  All the participants contributed to its success And i could feel the vibrance as I rose to address With our academic thirst quenched And our souls fully drenched ...

नवाज़िश करम शुक्रिया मेहेरबानी

Image
नवाज़िश करम शुक्रिया मेहेरबानी  This is a poem which I wrote to  thank my local branch IMA members for the co-operation they extended to me as I went on with the preparations to organise the  annual CME of IMA Moradabad as Organising Chairperson इक राह चली  थी  न कुछ पाने की चाह  न कुछ खोने का डर  कुछ खुद पर भरोसा था और  कुछ अंतरात्मा की इक चाह का असर आसान तो  नहीं थी किन्तु कठिन भी न थी ये डगर कुछ सहारा  था तो  कुछ हौसला खुद बटोरना  था   कुछ   सीखना  कुछ सिखाना तो  कुछ निभाना था  एक खाका बनाना था और उसमे रंग भरने थे  साधन जुटाने थे गंतव्य तक पहुँचाने थे  अपनी अपनी विधाओं में पारंगत जनों का संगम बनाना था  उनसे अपनी IMA फैमिली को लाभान्वित कराना था    दोस्ताने  ने सबके कुछ ऐसा रंग जमाया हौसला हम सब कार्यकर्ताओं का ऐसा बढ़ाया  कि  मुड़  कर न देखा फिर किसी ने भी पीछे  और गंतव्य तक पहुँचने की चाह रखती थी हम सबको...

वो मेरे कुछ बेहद अपने पल

Image
                                                                                  वो मेरे कुछ बेहद अपने पल     रोज सुबह सवेरे का सैर सपाटा   और मेरी   रोज की  ये   दिनचर्या   धरती के छोर से   झाँकती हुई    वो   सुबह की लालिमा   और   मन को सुकून देती   मिटटी की वो   सोंधी  खुशबू   फूलों के वो    चटक रंग , और वो    उड़ान भरते   जीव जंतु     कहीं  है   कोयल की कूक   तो कहीं  है   वानरों का उत्पात दीखता है हर जगह   उस ईश्वर का ही प्रताप   कभी  छायाचित्र लेना तो   कभी दूब पर यूँ ही    बैठ जाना     कभी पतंगों को हवा में स्थिर   तो   कभी इठलाते...

एक सुनहरा सफर

Image
  साँसारिक सफर के  हमसफ़र  तुम और मैं अपने अपने फन में मगन गुफ्तगू करते चलते गए अनवरत और देखो तो कहाँ तक निकल आये आह्लादित हूँ मैं तुम्हारी इस उम्दा पहचान से इस सकारात्मक सोच से इन  विवेकी अभिव्यक्तियों  से इन मनीषी कथनों से इन चिन्तनशील अदाओं से तो फिर क्यों न आवाज़ दूँ अपनी इन भावनाओं को आकांक्षाओं को अपेक्षाओं को कुछ गहराती कुछ उफनती अंतर्मन की इन उम्मीदों को और चलती रहूँ छोड़  पीछे  कुछ अंधकारमयी साए लिए हुए शाश्वत एक चिरकालिक  पूर्णविराम की उम्मीद अर्चना टंडन

गुरुत्वाकर्षण

Image
गुरुत्वाकर्षण का केंद्र मुझमें  है और तुम में भी धरती में है और मंगल में भी  सूरज में है और चाँद में भी  और हम सब को खींच रहा है  अपने ही अंदर के देवत्व का आकर्षण  जिसे सब कहते हैं गुरुत्वाकर्षण  अपने गुरुत्वाकर्षण से खींचते दूसरों के से खिंचते  कभी रोते  तो कभी हँसते गाते कभी रुलाते तो कभी हँसाते  कुछ पल जीते कुछ जिलाते कुछ को सहारा देते तो कुछ से लेते  कुछ हासिल करने की चाह लिए कभी कुछ खोते कभी पाते  चले जा रहे हैं उसके गुरुत्वाकर्षण से  खिंचे उस गुरु से मिलने उसके अंदर समाने  उस अनंत परमात्मा का आकर्षण  ही  है  असली गुरुत्वाकर्षण -- अर्चना टंडन  

ज़िन्दगी मेरी कलम से

Image
        ज़िन्दगी मेरी कलम से किताब मेरी कलम मेरी सोच मेरी  मगर जो लिखती हूँ वो दुनिया से ही सीखा है  अश्क है रश्क है या ख़ुशी के दो लफ्ज़ हैं  ये फसानों को बयां करती रचना मेरी है समझ समझ की  बात  है वरना   ज़िन्दगी  भी तो इक  बिसात  है ग़र   समझ  सकें हम इस बात  को तो  हंस कर गुजार लेंगे  ईश्वर की इस सौगात  को  नवाज़िश  करम  शुक्रिया  मेहरबानी  करते  करते गुजारोगे  जो  ज़िंदगानी  रहमतों की बारिश से जो फिर सजेगी ज़िन्दगी की धुरी  तो  रह न जाएगी फिर  कोई भी ख्वाहिश अधूरी ज़िन्दगी सुलझती है  या कि ज़िन्दगी  उलझती है  वक़्त  बदलता  है  य़ा कि  वक़्त  संवरता  है   क्या  आज  की परेशानी  है  बीते  कल  की  पशेमानी  का  सबब या   कि  होगी  कल  की  रवानी  आज  की  अक़ीदतों  का ...

आग़ोशे -- तन्हाई

Image
आगोशे – तन्हाई जली हूँ मैं कहीं रोशनी बिखेरने के लिए    जान कर भी कि इस जूनून का अंत रुसवा ई है तनहा न समझ तू मुझे सुकून मिला है मुझे इस आगोशे त न्हाई में अर्चना टंडन 

एक अर्थपूर्ण सफर की प्यास

Image
जिस रचना में एहसास को महसूस न कर सकें जिस रचना से ईमान पर  लगाम न कस सकें जिन रचनाओं को शाब्दिक लहू से सींच न सकें ऐसी ग़ज़ल में कुछ कमी महसूस होगी मुझे हर रचना में एक सच्चाई हो कुछ कल्पना कुछ गहराई हो ऐसा कुछ लिखें और रचें हम कि नासमझी के  अंधेरे को कम कर सकें हम रचनाओं से अपनी एक जीवंत संदेश दे सकें हम उत्साह और समझ से सही को सही और गलत को गलत ठहरा सकें हम भागते ज़माने को ठहराव दें और ठहरे ज़माने को चला सकें हम कुछ को सहारा दें तो कुछ से सहारा पा गति पा सकें हम ऐसी रचना की कल्पना में मैं भी चल तो दी पर क्या इसे पूर्ण  कर पाऊँगी पूर्ण विश्वास है चलूंगी तो पहुँचूगी भी और अंतर्मन को कहीं विश्राम भी दे पाऊँगी  अर्चना 

खुद को कैद क्यों करो

Image
खुद को कैद क्यों करो  खुद को कैद क्यों करो करो कि तुम अपना सच देख सको   समाज के बंधन कितने सच हैं यह जान सको करो कि आत्म -मंथन कर सको और तुम अपने आप को पहचान सको खुद को कैद क्यों करो करो की समाज की जकड़न से उभर सको चारों तरफ फैली ज़ंजीरों को सुलझा  सको अपनी समझ और भावनाओं को विस्तार दे सको पढ़ो खोजो और समझो कि तुम्हारे जैसे अनेक हैं जो तुम्हारी तरह सोचते हैं जीते हैं और तुम इस क़ैद से फिर ख़ुशी ख़ुशी मुक्त हो  सको खुद को क़ैद क्यों करो खुद को क़ैद करो, एक बेबसी के लिए नहीं एक बदलाव के लिए  एक सोच के लिए आत्म  विश्लेषण के लिए कि इस क़ैद से तुमने क्या पाया जानने के लिए कि  सत्य और विश्वास ही जड़ें हैं सब शक्तिओं की खुद को क़ैद क्यों करो यह जानने के लिए कि क़ैद सजा नहीं है क़ैद इंसान को मार नहीं सकती कैद की विपरीत परिस्थियाँ इंसान क...

सोच तेरी - मेरी

Image
      तू कहता है  पैसा ही   सब कुछ है मैं कहती हूँ पैसा कुछ भी नहीं पैसे से आप आदमी खरीद सकते हैं पर विश्वास नहीं पैसे से आप डिग्री   खरीद   सकते हैं पर ज्ञान नहीं पैसे से आप घर खरीद सकते हैं पर अंदर बसा प्यार और शान्ति नहीं पैसे से आप परखनली शिशु पैदा कर सकते हैं पर मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बच्चा नहीं तू कहता है जंग से   दुनिया जीती जाती है मैं कहती हूँ प्यार से दुनिया   जीती जाती है जंग से आप अप ना  झ ण्डा    लहरा     सकते   हैं पर उस जीत में अनगिनित   वीरों   का लहू   होगा जंग से आप जीत हासिल कर सकते हैं जबरदस्ती काबिज हो सकते हैं  पर वो जंग आप जीत कर भी हारते हैं क्योंकि नाम कमाने से जीत नहीं होती   जीत तो नाम कमाने की वजह   और   तरीके   से  होती   है नाम   तो   जैसे   राम का हुआ...