समर्पण




 On Parents Day
 I share my new creation.


मुझ में तू है
इस बात का है गुमान
तुझमें मैं नहीं
क्यों करूँ इसका मलाल
तू जिसके लिए जी रहा है
उसकी चंद सांसें हैं शेष
जिसने न्योछावर कर दिया हर पल
अपना सुकून, अपना सब कुछ
कि तुम एक राह पकड़ सको
अपना अस्तित्व बना सको
तो एक क्या
तुम्हारे हर पल का स्वामी है वो
उस पर, इन चंद बचे हुए लम्हों में
एक युग भी न्योछावर करोगे
तो मैं कहूँगी, कि कहीं कमी रह गई

डॉ अर्चना टंडन

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