तलाश



मैं खुद से छिटक के दूर जा गिरी
शायद एक नए खुद की तलाश में
फिर बुनना चाहा था
अपना एक नया वजूद
शुरू हुआ था बुनना 
एक नया ताना बाना
ढालना हुआ था खुद का
एक नए स्वरुप में

बहुत सराहा गया था
मेरा ये नया रूप
कोई कमी नहीं थी
मेरे इस नए रूप में
संभावनाएं ,प्रशंसाएं ,
जागरूकता और संवेदनशीलता
सभी कुछ तो था यहाँ
फिर क्या था जो
अंदर कहीं मुझे कुरेद रहा था
भूलभुलैया का एहसास करा रहा था

खोजा तो पाया 
कि खुद को तो वहीँ छोड़ आई थी
जहां से एक नई राह पकड़ी थी
एक साथ मिला था
जिसने मेरे वजूद से
मेरा परिचय करवाया था
भयावह था यहाँ का शून्य
और इस शून्य का शोर

मुझे वापस जाना था
वहीँ ,उसी चौराहे पर
जहाँ से ये राह पकड़ी थी
अपने आप को समेटा
और चल दी वहीँ एकांत की तलाश में
खुद को पाने
जहाँ खुद के जैसे ही
एक शख्स से मुलाक़ात हुई थी



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